Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
8 Jul 2025 · 1 min read

*साम्ब षट्पदी---*

साम्ब षट्पदी—
08/07/2024

(1)- प्रथम-तृतीय तथा चतुर्थ-षष्ठम तुकांत
आनाकानी

आनाकानी।
वो करते रहे।
सोची समझी नादानी
लेकिन हम ये जानते थे।
कुछ न कुछ अच्छा भी वो करेंगे
उन्हें इसीलिए सदा गुरु मानते थे।।

(2)- प्रथम-द्वितीय, तृतीय-चतुर्थ, पंचम-षष्ठम तुकांत

दानापानी।
खोजती है रानी।।
चली गई जब सत्ता।
हिलता नहीं है कोई पत्ता।।
करनी पुरखों के भुगत रही।
सोच सोच दिमाग का बनता है दही।।

(3)- द्वितीय-चतुर्थ तथा षष्ठम, प्रथम तुकांत

खींचातानी।
होती है बातों में।
अब चैन कहाँ पायें,
अकसर रोते हैं रातों में।।
ये सिलसिले कब थमेंगे बोलो,
रोज पूछती है सपनों में नानी।।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य
(बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

[][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][][]

Loading...