मुक्तक
मुक्तक
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यदि दिल में उतर करके, हमें वह यूॅं न भरमाते।
तो माखन चोर से फिर वे, क्या चितचोर कहलाते।
विरह की वेदना पीड़ा को, क्या दुनियाॅं समझ पाती।
हमें यूॅं छोड़कर माधव, यदि मथुरा नहीं जाते।।
~ राजकुमार पाल (राज)
(स्वरचित सर्वाधिकार सुरक्षित)