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16 Aug 2025 · 1 min read

आओ कान्हा

आओ कान्हा,
दया दिखाओ कान्हा ।
छाओ चित में,
मोहे न बिसराओ कान्हा ।

करुण पुकार सुनो मेरी,
कृपा तुम बरसाओ कान्हा ।
हार रहा मन मन के हाथों,
राह तुम दिखलाओ कान्हा ।

जीत सकूँ स्वयं स्वयं के आगे ,
स्वयं को हर ले जाओ कान्हा ।
नयन बिलोकत पल छिन पल छिन ,
सखी सी प्रीत निभाओ कान्हा ।

भाव भरे यह मन भीतर गहरे ,
गोपी सा रास रचाओ कान्हा ।
गीत गढूं नित नित तेरे ,
अधरन प्यास बुझाओ कान्हा ।

विनय यही बस लाज रखो मेरी ,
“निश्चल”को न बिसराओ कान्हा ।
आओ कान्हा, दया दिखाओ कान्हा ।
छाओ चित में,मोहे न बिसराओ कान्हा ।

….. विवेक दुबे”निश्चल”@…

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