देव शयनी एकादशी
देव शयनी एकादशी
मन मंदिर में आत्मा रूपी, विष्णु हृदय में बैठे हैं
चतुर्मास अंतस तप को, श्री हरि शयन कहते हैं
पावस ऋतु के चार मास, जप तप के अनुकूल
एक स्थान पर ठहर साधक, आवागमन प्रतिकूल
निरंकार सृष्टि सभी, शिवमय हो जाती है
आत्मा और ब्रह्म की, सत्ता का आनंद दिलाती है
वर्षा ऋतु और त्योहारों का, एक उल्लास निराला है
देवउठनी ग्यारस तक जप, नमः शिवाय की माला है
सुरेश कुमार चतुर्वेदी