*रोती हैं घर की छतें, बारिश से नुक्सान (कुंडलिया)*
रोती हैं घर की छतें, बारिश से नुक्सान (कुंडलिया)
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रोती हैं घर की छतें, बारिश से नुक्सान
टप-टप-टप-टप कर रहे, सब कमरे-दालान
सब कमरे-दालान, सड़क पर पानी भरता
घर में यह घुसपैठ, गली में तांडव करता
कहते रवि कविराय, डराती बारिश होती
दुख देते हैं मेघ, कह रही जनता रोती
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451