जलहरण घनाक्षरी छंद
जलहरण घनाक्षरी छंद
सृजन पँक्ति- मुख के माखन पर
विधान: ८,८,८,८
चरणान्त पर दो लघु
ग्वाल-बाल टोली संग, गोपियों को करे तंग,
फोड़े मटकी कन्हाई ,
चोरी-चोरी छुपकर ।
माधव से गयी छली, सुध-बुध भूली भली,
बह गया रोष सारा,
देख छवि लीलाधर।
राग अनुराग भरे, मुरली अधर धरे,
मुदित थी ब्रजबाला,
प्रेम अश्रु रहे झर ।
शिकायतों की पोटली, खोले नहीं मैया भोली,
बलिहारी जाए मधु,
मुख के माखन पर।
–मधु झुनझुनवाला “अमृता”