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7 Jul 2025 · 1 min read

जलहरण घनाक्षरी छंद

जलहरण घनाक्षरी छंद
सृजन पँक्ति- मुख के माखन पर
विधान: ८,८,८,८
चरणान्त पर दो लघु

ग्वाल-बाल टोली संग, गोपियों को करे तंग,
फोड़े मटकी कन्हाई ,
चोरी-चोरी छुपकर ।

माधव से गयी छली, सुध-बुध भूली भली,
बह गया रोष सारा,
देख छवि लीलाधर।

राग अनुराग भरे, मुरली अधर धरे,
मुदित थी ब्रजबाला,
प्रेम अश्रु रहे झर ।

शिकायतों की पोटली, खोले नहीं मैया भोली,
बलिहारी जाए मधु,
मुख के माखन पर।

–मधु झुनझुनवाला “अमृता”

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