Paise Ka Sab Khel
आज मैं हर चीजों को
दस – पचास – सौ – हज़ार में
बिकते देखा है |
मैंने इंसान को पेट भरने के लिए
अपने आपको बाजार में बेचते देखा है |
इंसानियत को भी चंद पैसों के लिए
बाज़ारों में मरते – बिकते देखा |
दुनिया में पैसों का ही सब खेला है ,
यह कहने वाले मैंने पैसों को देखा है ||