'कन्या की चीख'
कन्या चीख-चीख कर रोई।
भारत की डूबी नाव ऊवारो कोई।।
इसी देश में’निर्भया’दिल्ली की बस में आई,
बलात्कारियों ने ‘निर्भया’ नोच-नोच कर खाई।
इन बेशर्मों की न जाने,बुद्धि कहां पर खोई थी,
बस में किया ‘चीरहरण’,निर्भया चीख-चीखकर रोई थी।
फिर न बन जाए कोई ‘निर्भया’, इनको बुद्धि दे दो कोई ।।
कन्या चीख-चीख कर——————
एक घटना है गोरखपुर की, रात में चिता जलाई थी,
हालत देख बेटी की भाईयो,माता भी गई लजाई थी।
क्या हक न था जीने का, की उसके साथ गुस्ताखी थी,
न कर सके बयान बेचारी, जीभ भी उसकी काटी थी।
हालात देखकर उस बाला की, धरती खून के आंसू रोई ।।
कन्या चीख-चीख कर ——————–
यही घटना फिर हवनो ने, “डॉक्टर ट्रेनी” संग अपनाई थी,
इतना गुना उस “मोमिता” का, जुर्म के खिलाफ आवाज उठाई थी।
अंग भंग किये उसे बेटी के, जिसने दूसरों का जीवन बचाया था,
फोन सुना जब पिता ने उसके, खाना भी ना खाया था।
लड़की कहां सुरक्षित है, यह बात समझ ना आई
कन्या चीख-चीख कर—————–
कहां गया वो वैदिक भारत, जहां नारी पूजी जाती थी,
विद्यालयों में कल तक भाइयों,नैतिकता पढ़ाई जाती थी।
विदेशी अनुकरण में बच्चे, सारे संस्कार भूल गए,
‘पॉर्न’ वीडियो देखते हैं,ये सब रिश्ते नाते दूर हुए।
‘यादकेत’करे विनती,भारत की बिगड़ी दशा सुधारो कोई।।
कन्या चीख-चीख कर———————-