मुझे तुम ऐसा मिलना
मुझे तुम ऐसा मिलना
जैसे नदियां मिलती हैं किनारों से।
तुम मुझे ऐसे छूना जैसे
कोई छुए एक नवजात को।
तुम मुझे ऐसे देखना जैसे
एक विरहनी देखती है चांद को।
और तुम मुझमें ऐसे रहना जैसे
शिव रहते हैं सती के ध्यान में।
निवेदिता रश्मि।