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6 Jul 2025 · 1 min read

तोरे नैना

✍️ रचनाकार: श्रीहर्ष

तोरे नैना —
अमावस्याक राति जेकाँ,
कतहु दीप जरल — काँपैत लौमे हमर छाया हेराएल।

तूँ चुप —
मुदा तोहर नयन कहि देलनि से सभ,
जे शब्द कखनो नै कहि सकल।

ओ चितवन —
जेना नदीक धार — शान्त, मुदा भीतर बहैत
अकथ ज्वार सन।

हम बूझलहुँ —
लोरी नहि छल ई,
ई तऽ आत्माक गुप्त आरोह —
जे हृदयक सीढ़ी सँ ऊपर चढ़ल।

तोरे नैना —
मोर मोनक भूगोल ,
जतय दुःखो प्रेममे पिघैल जाएत ।

पुछलहुँ अपने सँ —
“की ई नजरि भाग्यक प्रश्न की?”
आ उत्तर भेटल —
“तोरे नैना — स्वयं उत्तर थिक!”

–श्रीहर्ष

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