क्या क्या देखना
क्या क्या देखना हमें पड़ गया है।
दिल यहीं पर आ के अड़ गया है।
इतनी बेतकल्लुफी से न बात करो
ध्यान हर किसी का उखड़ गया है।
खूबसूरती इतनी भी किस काम की
जिसने देखा , हो वो जड़ गया है।
बेवफाई क्या है , उससे पूछो तुम
जिसका यार अभी बिछड़ गया है।
अब अश्क भी आंखों में नहीं आते
नगर दिल का ऐसे उजड़ गया है।
सुरिंदर कौर