चिंतन
चिंतन
हमारे समाज दो ही बिरादरी हैं एक अमीर बिरादरी! दूसरी गरीब बिरादरी! और यादव, ब्राह्मण मूर्खों की तरह आपस में लड़ रहे हैं बेहतर होता गरीबी से लड़कर अमीर बिरादरी में शामिल होने का प्रयास करते। क्योंकि जाति सिर्फ गरीब की पूछी जाती है अमीर की कभी नहीं!
©दुष्यन्त ‘बाबा’