कभी हादसों में गई जान, कभी रिश्ते टूटे,
कभी हादसों में गई जान, कभी रिश्ते टूटे,
कभी सड़कों पर बिखरे सपने, कभी खून के छींटे,
पर शराबी की आँखों पर पड़ा है ऐसा परदा,
जो उसे नरक को भी जन्नत बता देता है,हर दफ़ा।
ओ समाज! कब उठेगी वो आवाज़?
जो इन नशे के दीवानों को दिला सके सज़ा।
मत कहो ये “आदत” है, ये है “अंधा जुनून”,
जो जलाता है घर, रिश्ते और हर मासूम सुकून।
करन केसरा