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4 Jul 2025 · 1 min read

तुम मुझे टुकड़ों में मिलते हो।

तुम मुझे टुकड़ों में मिलते हो।

सौ ग्राम मेरे हिस्से में ,
नौ सौ ग्राम में दुनिया!

दुनिया के लिए तुम ,
एक गिनती भर हो।

मेरे लिए तुम ,
जिंदगी की लौ हो।

क्या कभी ऐसा होगा!
मेरे लिए नौ सौ ग्राम,
दुनिया के लिए सौ हो जाओ!

देखो! सुना है कि
जो पूरा मिले उसे
अधूरा नहीं मिला करते।

तो तुम मुझे सौ ग्राम नहीं
पूरे हजार ग्राम मिलो!

पहले मिलो तो सही!

#निवेदिता रश्मि
छपरा, बिहार।
12–11–2023

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