फलाने का करबा
घूम जाई मूसर चान फलाने का करबा ।।
परसों ह भतवान फलाने का करबा ।
पाँव पुजाई ससुरारी जब जाबा तू ।
अंगूठी या सिकड़ी पे खिचड़ी खाबा तू ।
सढ़ूआईन खूंखार फलाने का करबा,
परसों ह भतवान फलाने का करबा ।
माड़ो में चुपचाप फलाने जाया तू ।
जवन मिली बिन नाटक कइले खाया तू ।
ना त सरहज खींची कान फलाने का करबा
परसों ह भतवान फलाने का करबा ।
गिफट उफट के चक्कर में जिन पड़ीहा तू ।
भईंस मिले चाहे गदहा पड़िया रखिहा तू ।
अगुआ हव बेईमान फलाने का करबा,
परसों ह भतवान फलाने का करबा ।
ना मुँह बनाया जूता के चोरवाई में ।
महंगा पड़ जाई भाय बिहान विदाई में ।
साली हव रंगदार फलाने का करबा,
परसों ह भतवान फलाने का करबा ।
~ धीरेन्द्र पांचाल