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3 Jul 2025 · 1 min read

जिनके निशाँ दिल की ज़मीं पे थे बहुत गहरे ।

जिनके निशाँ दिल की ज़मीं पे थे बहुत गहरे ।
वक़्त-ए-बद में मिट कर रह गए वो रिश्तों के भरम सारे।।
मधु गुप्ता “अपराजिता”

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