कविता और कलम से एक शिकायत अब भी है
कविता और कलम से एक शिकायत अब भी है
क्या तुम थके नहीं मेरा रंग -रूप, चाल -ढाल , प्रेम -संघर्ष
लिखते -लिखते
अब तो लिख दो मेरे हिस्से मेरा खुला आसामान भी।।
कविता और कलम से एक शिकायत अब भी है
क्या तुम थके नहीं मेरा रंग -रूप, चाल -ढाल , प्रेम -संघर्ष
लिखते -लिखते
अब तो लिख दो मेरे हिस्से मेरा खुला आसामान भी।।