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3 Jul 2025 · 1 min read

कविता और कलम से एक शिकायत अब भी है

कविता और कलम से एक शिकायत अब भी है
क्या तुम थके नहीं मेरा रंग -रूप, चाल -ढाल , प्रेम -संघर्ष
लिखते -लिखते
अब तो लिख दो मेरे हिस्से मेरा खुला आसामान भी।।

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