मेरा बिहार
“मेरा बिहार” 🪔
जहाँ माटी सुवासित है श्रम की सुवास से,
जहाँ लोकजीवन सजीव है अपने उल्लास से।
गंगा की गोद में जो धुला हुआ विचार है,
स्वाभिमान से भरा, वह मेरा बिहार है॥
जहाँ नालंदा की दीपशिखा से ज्ञान जला,
जहाँ तक्षशिला का स्वर अम्बर तक चला।
जहाँ बुद्ध ने करुणा का पथ प्रशस्त किया,
जहाँ अशोक ने शांति का संदेश रच दिया॥
जहाँ खेतों में लहराती फसलें मुस्काती हैं,
जहाँ लीची, चूड़ा-दही की गंधें लुभाती हैं।
जहाँ छठ की आराधना नभ तक पुकार है,
वहीं प्राची का वह पुण्य प्रदेश बिहार है॥
जहाँ श्रमिक के श्रम में तेज छिपा होता है,
जहाँ निर्धन भी स्वप्नों से विमुख न होता है।
जहाँ चाणक्य की नीतियाँ अब भी प्रेरणा हैं,
जहाँ जयप्रकाश की क्रांतियाँ स्मरणीय वंदना हैं॥
भाषाओं की मधुरता – मगही, मैथिली, अंगिका,
संस्कृति की कोमलता – लोकगीतों की रचना।
यह केवल भूमि नहीं, यह चेतना का विस्तार है,
जीवन-मूल्यों का सच्चा आधार है॥
ये मेरा बिहार है ये मेरा बिहार है
हां ये मेरा बिहार है
विनीता शाहा