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2 Jul 2025 · 1 min read

जिसे इस खून से सींचे वहीं आवाज़ बनेंगे ,

जिसे इस खून से सींचे वहीं आवाज़ बनेंगे ,
न मुजरिम कल थे और न हम आज बनेंगे।
ये दौर बहरे हुकूमत का जिसे हम समझ नहीं सकते,
ज़ुल्म कितना भी कर लो हम मुल्क की आवाज़ बनेंगे।
Phool gufran

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