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2 Jul 2025 · 1 min read

वर्षा और जीवन - अंजनेय छंद

वर्षा और जीवन – अंजनेय छंद

धूम मचाकर बरसा आती।
नभ में अपनी नाच दिखाती।।
भिन्न-भिन्न वह वेश बनाती।
अवनी देख जिसे इठलाती।।

मन मयूर भी झूम रहा है।
धरती अम्बर चूम रहा है।।
सभी चराचर राहत पाये।
तन-मन जो सबका हर्षाये।।

वर्षा वरती जीवन सबको।
देती यौवन है तरुवर को।।
उपवन में फूल खिलाती है।
खुशबू समीर भर जाती है।।

तपती धरती गीली पड़ती।
उर्वरता है इससे बढ़ती।।
सुंदर-सुंदर पाठ पढ़ाती।
अन्नपूर्णा अवनि कहलाती।।

पोषण सबको जिससे होता।
भूखा रहकर जीव न सोता।।
धरती उर्वर करने वाली।
भूतल पर लाती हरियाली।।

भूजल का संतुलन बनाए।
अन्न-भंडार जग अपनाए।।
हर्षाकर पाठक कहता है।
इससे हीं जीवन रहता है।।

रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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