सार छंद गीत
आधार छंद सार
विधा गीत
परिचय 28 मात्रा ,सममात्रिक छंद
पदांत गुरु गुरु
यति 16-12
शीर्षक – ये बंधन मत तोड़ो
छंदों के धागों में बाँधू, मैं भावोंके मोती।
गीतों में लिख देती हूँ जो,पीर हृदय में होती।
प्रीत हुई कान्हा से कैसी,सुध बुध भूली राधा।
देख अधर से लगी बांसुरी,नहीं मिलन में बाधा।।
अब तो ये बंधन मत तोड़ो,बोली खुद में खोती।
गीतों में लिख देती हूँ जो,पीर हृदय में होती।।
प्रीत प्रसूनों की देखें तो,कंटक जल भुन जाएँ।
संग पवन सौरभ घुलती तो,मन प्रसून गुन गाएँ।।
प्रीत पतंगे की देखूँ तो, नयन आँसू भिगोती।
गीतों में.लिख देती हूँ जो,पीर हृदय में होती।।
प्रीत तुम्हीं ने सिखलाई है ,ये बंधन मत तोड़ो।
जन्मों का बंधन है मोहन, अब इसको क्यों छोड़ो।।
लगा के वंशी निज अधर से,नौ-नौ आँसू रोती।
गीतों में लिख देती हूँ जो, पीर हृदय में होती।।
मनोरमा जैन पाखी