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1 Jul 2025 · 1 min read

दोहा त्रयी. . . . . आधुनिक

दोहा त्रयी. . . . . आधुनिक

लिखता है लेखक वही, जैसा दिखे समाज ।
सच कहने में वह कभी, करता नहीं लिहाज ।।

हाथों में ले हाथ वह, करता है अभिसार ।
कैसा यह आखिर भला , नवयुग का संसार ।।

स्वछंदता का आजकल, मतलब केवल भोग ।
मुक्त पान इसका करें , आज आधुनिक लोग ।।

सुशील सरना / 1-7-25

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