दोहा त्रयी. . . . . आधुनिक
दोहा त्रयी. . . . . आधुनिक
लिखता है लेखक वही, जैसा दिखे समाज ।
सच कहने में वह कभी, करता नहीं लिहाज ।।
हाथों में ले हाथ वह, करता है अभिसार ।
कैसा यह आखिर भला , नवयुग का संसार ।।
स्वछंदता का आजकल, मतलब केवल भोग ।
मुक्त पान इसका करें , आज आधुनिक लोग ।।
सुशील सरना / 1-7-25