*आया युग ईमेल का, इक्का-दुक्का डाक (कुंडलिया)*
आया युग ईमेल का, इक्का-दुक्का डाक (कुंडलिया)
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आया युग ईमेल का, इक्का-दुक्का डाक
वरना युग था डाक की, चौतरफा थी धाक
चौतरफा थी धाक, डाकिए चिट्ठी लाते
सब आदान-प्रदान, खुशी-गम के थे पाते
कहते रवि कविराय, कर्मरत अब भी पाया
नमन डाकिया-बंधु, डाक जो लेकर आया
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451