!! नारी!!
नारी हो न निराश, करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
जग में रहकर, कुछ नाम करो।।
नारी सावित्रीबाई थी, जिसने शिक्षा की ज्योत जलाई थी,
खोला विद्यालय महिलाओं का, विद्या आरंभ कराई थी।
तुम भी शिक्षा ग्रहण करो, जग में रहकर कुछ नाम करो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो ———-
नारी रमाबाई थी, सारे कष्टों को झेला था,
न पति से कोई शिकवा था, भीम की पूरी कराई पढ़ाई थी।
नेक काम में तुम भी,अपने पतियों की ढाल बनो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो———–
नारी झलकारी वाई थी, तनिक नहीं घबराई थी,
मरते दम तक युद्ध किया, दुश्मन को मुंह की खिलाई थी।
संघर्षों से मत डरा करो,जग में रहकर महान बनो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो———–
स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर थी,
मधुर स्वरों से अपने, संगीत में पहचान बनाई थी।
मधुर स्वरों का गान करो, जग में रहकर कुछ नाम करो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो ——–
नारी प्रतिभा सिंह पाटिल थी, देश की कमान संभाली थी,
प्रथम महिला राष्ट्रपति इतिहास में नाम लिखाई थी।
तुम ऐसी ही महान बनो, जग में रहकर कुछ काम करो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो ——
एक नारी मदर टेरेसा थी,
मरीजों की करती सेवा थी।
तुम भी दुखियों का सहयोग करो।।
कुछ काम करो, कुछ काम करो —
नारी हो न निराश, करो मन को,
कुछ काम करो, कुछ काम करो।
जग में रहकर, कुछ नाम करो।।
स्वरचित रचना, ओमवती “यादकेत”
अमरोहा (उत्तर प्रदेश)