बेवजह ही अपने आप को दोषी बताया है,
बेवजह ही अपने आप को दोषी बताया है,
ना जाने कितनी बार खुद का दिल दुखाया है।
बदल जाते हैं वो जो खुद को अपना बताते हैं,
हँसते हुए चेहरे को रुलाकर जाते हैं।
जितना अनुभव मिला उसमें यही समझ आया है
सच्ची भावनाओं को कोई ना समझ पाया है।
जिसने जैसी सोच रखी वैसे ही किरदार निभाते हैं
ना जाने क्यों वो अपने अक्सर बदले बदले से नज़र आते हैं।