बाबा भैंया दर पर तेरे- भजन रचनाकार अरविंद भारद्वाज
बाबा भैंया दर पर तेरे, घी की जोत जलाऊँ
मन्नत पूरी करना बाबा, भेली गुड की चढ़ाऊँ
नीले घोड़े की करे सवारी, खड़ग हाथ में तेरे
कष्ट बहुत झेले है मैने, हर लो दुख अब मेरे
झण्डा लेकर हाथ में अपने, द्वार तेरे मैं आऊँ
बाबा भैया दर पर तेरे, घी की जोत जलाऊँ
मन्नत पूरी करना बाबा, भेली गुड की चढ़ाऊँ
झोली भरता है तू सबकी, सबको पार लगाता
बाबा भैया जयकारे संग, भजन तेरा जो गाता
शिखर तेरे दर बाबा जी मैं, ध्वजा एक लहराऊँ
बाबा भैंया दर पर तेरे, घी की जोत जलाऊँ
मन्नत पूरी करना बाबा, भेली गुड की चढ़ाऊँ
जगमग तेरी जोत जले, दुखड़े तू दूर है करता
दीन-दुखी भूखे का बाबा, तू ही पेट है भरता
अरविन्द लिखकर भजन ये तेरे, भेंट मैं तुझको चढ़ाऊँ
मन्नत पूरी करना बाबा, भेली गुड की चढ़ाऊँ
बाबा भैंया दर पर तेरे, घी की जोत जलाऊँ
मन्नत पूरी करना बाबा, भेली गुड की चढ़ाऊँ