श्याम बिना यह जीवन - किरीट सवैया छंद
श्याम बिना यह जीवन- किरीट सवैया छंद
नैनन श्याम बसे जिनके वह रूप अनूप रखें मन भावन।
निर्मल हो मन जो अपना फिर ढूंँढ रहा जल क्यों अति पावन।।
श्याम कहें वृषभान सुता तुम नैनन में रखती जब सावन।
चैन मुझे रखना फिर मुश्किल साँस लगे तन प्राण जलावन।।
प्रेम सुधा रस पान करे उर अंतस से हरि ध्यान लगावन।
हे चितचोर करो मत शोर कहूँ कब दर्शन पाकर साजन।।
देर सदा करते रहते तुम सोच यही छलका अब सावन।
श्याम बिना यह जीवन कुंठित मौत लगे मन को अति पावन।।
रचयिता:- राम किशोर पाठक
प्राथमिक विद्यालय भेड़हरिया इंगलिश, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978