#सादर प्रणाम#
करती हूं सादर सौ बार नमन, ‘गुरुदेव’आपके चरणों में।
हैं सारे तीरथ धाम, आपके चरणों में,
मन में ज्ञान का दीपक जलाया आपने।
सुपथ पर हमें चलना सिखाया आपने,
आपने अनभिज्ञो को राह दिखाई।
आभार व्यक्त करते हैं हम श्रीमान आपके चरणों में।।
करती हूं—————-
ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा,परिश्रम ही आपकी पूंजी हैं,
महकता जीवन जिससे आप ज्ञान की वह कुंजी है।
जितने गुण मनुष्यता में होते हैं आप उन सब की खान हो,
कोई जाने या ना जाने लेकिन आप बहुत महान हो।
मिलता है सच्चा सुख ज्ञान ‘हे गुरुवार’आपके चरणों में।।
करती हूं ———————
न जाने गुरुवर आपने कितनों का जीवन संवारा है,
करो दया मुझ पर भी ऐसी हो जाए कल्याण हमारा है।
अपने जीवन काल में कितनी कठिन तपस्या आपने की है,
ऐसे महान व्यक्तित्व हमारे प्यारे गुरुवर जी हैं ।
कम है जितनी बार करे ‘यादकेत’ वर्णन आपके चरणों में।। करती हूं———————–
स्वरचित रचना ओमवती ”यादकेत”
अमरोहा (उत्तर प्रदेश)