*सजदा*
उनकी यादों में हम गुनगुनाने लगे।
जाने क्यूं वो हमें यूं लुभाने लगे।।
हर मौसम अब तो सुहाना लगता है,
हर लम्हा उनका दीवाना दिखता है।
फूलों में चेहरा उन्हीं का खिलता है,
नूर उनका इन फिजाओं में मिलता है।
जगते-जगते हमें ख्वाब उनके आने लगे।।
जाने क्यूं——————
सादगी की देखो बिल्कुल मूरत है,
दिल में बस गई प्यारी उनकी सूरत है।
उनकी बातों में हम ऐसे खोते गए,
जैसे मुझको जमाने के’रव’मिल गए।
उनके प्यार में हम यूं मुस्कुराने लगे।।
जाने क्यूं —————
सांसें अब तो उनकी माला जपती हैं,
उनकी खुशबू हममें यूं ही बसती है।
उनके नाम से हम जाने जाने लगे,
जिनसे मिलने में हमको जमाने लगे।
हर कदम आज वो हमको पहचाने लगे।।
जाने क्यूं —————–
कोटि-कोटि प्रणाम उन्हीं चरणों में,
दुनिया के सब तीरथ धाम उन्हीं के चरणों में।
है मेरे लिए कुछ खास उन्हीं के चरणों में,
उनके सजदे में हम सर झुकाने लगे।।
जाने क्यूं —————-
स्वरचित रचना ओमवती ”यादकेत”
अमरोहा ( उ०प्र०)