#महानता#
मेरे बाबा भीम महान हैं, और बहुजनों की शान है।
शत-शत नमन है चरणों में, कोटि-कोटि प्रणाम है ।।
कितने दुख झेले बाबा तुमने,
परिवार न्योछावर किया तुमने।
बड़े से बड़ा दुख झेला तुमने,
अपने समाज की खातिर, बाबा हो गए कुर्बान है ।।
शत-शत नमन—————–
शोषित महिलाओं को बाबा तुमने सम्मान दिलाया है,
पुरुष सत्तात्मक समाज में नारी को अधिकार दिलाया है,
धर्मो में शोषित बहुजन जिनको तुमने उठाया है,
धार्मिक समाज में जीने का फिर, दिया उन्हें अधिकार है ।।
शत – शत नमन—————–
मरते वक्त कहां बाबा ने रगड़ा काट चला हूं,
हजार साल की टीवी को जड़ से काट चला हूं।
देखभाल रखना मेरे भाइयों हिस्सा बांट चला हूं,
सच्चाई का सच कहने को दे गए संविधान है।।
शत- शत नमन——————
एक बात कही बाबा ने इतना कहां बजाईओ,
लड़के अगर ने पढ़ पाए लड़कियों को जरूर पढ़िओ।
लड़की अगर पढ़ जाए तो सभ्य समाज की पहचान है,
कहे ‘यादकेत’ बाबा भीम फिर हुए समाज पर बलिदान हैं।।
शत – शत नमन ———————
स्वरचित रचना ओमवती ”यादकेत”
अमरोहा (उ०प्र०