कभी खुद को तनहा मत समझना, क्योंकि तनहा तो वो गुलाब भी है जो
कभी खुद को तनहा मत समझना, क्योंकि तनहा तो वो गुलाब भी है जो सारी दुनियां को महकाता है !
स्वरचित,
रजनी उपाध्याय
हैदराबाद, तेलांगना
कभी खुद को तनहा मत समझना, क्योंकि तनहा तो वो गुलाब भी है जो सारी दुनियां को महकाता है !
स्वरचित,
रजनी उपाध्याय
हैदराबाद, तेलांगना