किताब...
मैं
किताब ए मोहब्बत हूँ
मेरे पहले सफ़े पर नक्श है
इश्क़…
आख़िरी सफा बोझिल है
हिज्र से
बीच के पन्नों पर दर्ज हैं
हज़ारों हजार लम्हे
कुछ खुशनुमा
कुछ कड़वे, कुछ मीठे ज़ज्बात से पगे
हिमांशु Kulshrestha
मैं
किताब ए मोहब्बत हूँ
मेरे पहले सफ़े पर नक्श है
इश्क़…
आख़िरी सफा बोझिल है
हिज्र से
बीच के पन्नों पर दर्ज हैं
हज़ारों हजार लम्हे
कुछ खुशनुमा
कुछ कड़वे, कुछ मीठे ज़ज्बात से पगे
हिमांशु Kulshrestha