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29 Jun 2025 · 1 min read

उमराव जान अदा

एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल
जो फिर से होठों पे सजी है
खुशरंग हिना एक बार फिर
नाजुक हथेलियों पर रची है

नफ़ासत में डूबे अल्फाज़
दिलकश रूमानी अंदाज,
ऐसी मिसाल और कहाँ
उमराव, तू आज भी है जवान

अदाएं ऐसी कि दीवाना बना दे
कशिश इतनी कि घर भुला दे
हुस्न ओ जमाल का कायल जहान
उमराव, तू आज भी है जवान,

आज भी महफिल सजी है
आज भी मस्ताने हजारों है
जो थाम के दिल करते किस्से बयां
सच, उमराव, तू आज भी है जवान

Chitra

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