कितनी वफादार है, ये यादें
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” कितनी वफादार है ये यादें…
उम्र भर साथ निभाती है…!
कोई साथ रहे या ना रहे…
वक्त बदले या मौसम,
रीति-रिवाज बदले…
या बदले धरम,
ये हमसे दूर कहां जाती है…!
बिते हुए पल को यादों में सजा…
दिल पर दस्तक देकर,
अक़्सर बीती बातें मन में दोहरा जाती है..!
ये यादों की हवाएं…
कुछ गुनगुनाती है कानों में…!
यादें खुशियों की हो…
या फिर अनचाहे वक्त की हो,
कुछ न कुछ सिख…
या फिर संदेश दे जाती है…!
और मानसून की तरह…
नैनों की नीर बन,
वर्षा की बूंदें सा, अधरों में बह जाती है..!
कितनी वफादार है, ये यादें…
उम्र भर साथ,
निभाने की बातें कह जाती है…! ”
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