बरखा रानी आ गई
रानी बरखा आ गईं,करने को उपकार।
रिमझिम रिमझिम नीर दे,करें प्रकृति शृंगार।
करें प्रकृति शृंगार, बढ़ाकर भू हरियाली।
दिखे हरित आगाज, जहाँ थी वसुधा खाली।
हर्षित हुआ किसान,देख चुनर भू धानी।
दादुर करके शोर,बुलाते बरखा रानी।।
डॉ ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम