Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
28 Jun 2025 · 1 min read

अंधेपन का दौर देखिए,

अंधेपन का दौर देखिए,
बदली सबकी चाल ।
देख-देख करते अनदेखा,
किसे कहूँ यह हाल ?

अपराधों की सेज सजी है,
हर लोभी मन के आँगन में ।
वसुधा प्यासी तड़प रही है,
बरसातों के इस सावन में ।
ठूँठ हो गए वृक्ष सभी अब,
टूट गई हर डाल ।।

✍️ अरविन्द त्रिवेदी

Loading...