Sahityapedia
Sign in
Home
Your Posts
QuoteWriter
Account
28 Jun 2025 · 1 min read

लहरों के पग रीते हैं??

**लहरों के पग रीते हैं ??
**********************
आज कहूॅ मैं कैसे किससे
नदियों के तट रीते हैं?
रेत हठीली थमती जाए
लहरों के पग रीते हैं??

बाग बाग मंथर गति बहती
बहती सभी दिशाओं में
घाट घाट पर पूजित होती
सुंदर सृजित कथाओं में
नील गगन के छाए रहते
लहरों के पग रीते हैं??

कंकर कंकर रेत कणों को
अभिसिंचित करती रहती
मर्म वेदना को धोती सी
निर्मल अविरल बहती रहती
नीर रेत घुल घुल कर मिलते
लहरों के पग रीते हैं ??

हिम गिरि से निकली धारा
कल कल छल छल जाती है
वन उपवन को जीवन देती
अमिय बिछाती जाती है
निज आश्रय में साधन देते
लहरों के पग रीते हैं ??

खग कुल कलरव करते जल में
धवल हार सी बहती जाए
नदिया जीवन,जीवन धारा
जीवन में सुख भरती जाए
वसुधा का शृंगार हैं करते
लहरों के पग रीते हैं ??

रेत हठीली थमती जाए
नदियों के तट रीते हैं??
*********************************
डॉ मोहन पाण्डेय भ्रमर
28/6/25

*************************,***

Loading...