*अपने-अपने घर में सबने, यह परिवर्तन देखा है (हिंदी गजल)*
अपने-अपने घर में सबने, यह परिवर्तन देखा है (हिंदी गजल)
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1)
अपने-अपने घर में सबने, यह परिवर्तन देखा है
हाव-भाव में अपनों के अब, कब अपनापन देखा है
2)
घर की रोटी दालें चावल, लगते हैं किसको अच्छे
खाना बाहर का खाने का, रोजाना मन देखा है
3)
करती हैं व्यवसाय नौकरी, कर्मठ महिलाऍं प्रायः
कुर्ते की जेबों में उनके, स्वाभिमान-धन देखा है
4)
भारी-भरकम कर्जा लेकर, झूठी शान दिखाऍंगे
शादी-समारोह में सबने, धन का नर्तन देखा है
5)
बच्चों को चुप कर देते हैं, पकड़ा कर मोबाइल अब
घर-परिवारों में सब ने यह, नूतन प्रचलन देखा है
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451