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28 Jun 2025 · 1 min read

स्वप्नसाकार

🎵 गीत शीर्षक: “स्वप्नों का आकार”

मुखड़ा:
जब लिखने लगे मन की लहरें, बिन बोले विचार,
रंग भरो इन भावों में फिर, कर लो स्वप्न साकार।।

अंतरा 1:
अनुप्रेरित मन रचने निकले, हर मौन का भेद,
स्पर्श करे जो भी अधूरे, वे पन्नों में खेद।
धूप-सी जली संवेदना, बन जाए शृंगार —
रंग भरो इन भावों में फिर, कर लो स्वप्न साकार।।

अंतरा 2:
अंतर की वीणा से जागे, स्वर जो नींद में थे,
तारों की सी चुप हलचल को, बंधन आज मिले।
जो न सुन सके कोई भी स्वर, बोले अब सत्कार —
रंग भरो इन भावों में फिर, कर लो स्वप्न साकार।।

अंतरा 3:
उम्मीदों के पंख सुनहरे, छूएँ नभ का छोर,
माया के हर मोह-पिंजरे से तोड़ें अपने पोर।
संकल्पों की राख से उठती, अग्नि माँग उजास —
रंग भरो इन भावों में फिर, कर लो स्वप्न साकार।।

अंतरा 4 (उपसंहार):
श्वासों से ही दीप जले जब, मौन करे श्रृंगार,
धरती जैसा धैर्य मिले तो, बीज फूटे प्यार।
जब अंतर में नाचे साया, बन जाए आकार —
रंग भरो इन भावों में फिर, कर लो स्वप्न साकार।।

–मनोरमा जैन पाखी

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