उधार एक जादू है
उधार एक जादू है
मांँगे उधार और गिड़गिड़ाते, चरण छूकर ये फरमाते।
होगा नहीं तेरा-मेरा, बैक करूंँगा जल्दी तेरा।
उधार लेते समय लगे भिखारी, उधार से ले ली उसने फरारी।
मांँगो इनसे खुद बनो भिखारी, दूसरा करता राज सवारी।
जब भी अपने मांँगो पैसा, हाल बताते हैं ऐसा- वैसा।
उधार लेकर बदले इरादे, भूल गया वो सारे वादे।
एक साथ मिले न दिया उधार, किस्तों में मिले दिया उधार।
बहाने इनके होते निराले, मुंँह मोड़ें इनके घरवाले।
बार-बार इनके पास जाओ, दुखी मन से वापस हो जाओ।
उसको पैसा दो उधार, जो न लगवाए चक्कर चार।
उधार लेकर गायब हो जाते, झूठ पर झूठ ये फरमाते।
खुद दाता का मान घटाते, बहाने भिन्न-भिन्न बनाते।
उधार दो उतना किसी को, जितना जाओ भूल।
लेते समय लगता भिखारी, बाद में लगता शूल।
किसी को दो उधार तुम, चल जाता उस पर कोई जादू।
लेवा हो जाता बेकाबू, उधार लगता है एक जादू।
तनाव चिंता आर्थिक नुकसान, संबंधों में हो खटास।
धन की कमी समय की बर्बादी, विश्वासघात करता फरियादी।
जो इज्जत समय से बैक करे, दो उसको तुम उधार।
सुन लो लाख टके की बात, कहता दुष्यन्त कुमार।।