जीवन में तीन वस्तुओं का कभी क्षय नहीं होता है, ये कभी कम या
जीवन में तीन वस्तुओं का कभी क्षय नहीं होता है, ये कभी कम या नष्ट नहीं होती हैं
1. सत्य का-
सच्चाई सामने आने मे देरी हो सकती है, किन्तु कभी नष्ट नहीं की जा सकती है…
2. प्रेम का-
प्रेम सदा अक्षय है…
3. भगवान श्री का नाम-
प्रभु नाम कभी क्षय नहीं होगा अपने ईश्वर के नाम को हम कैसे भी याद करें, किसी भी रूप में करें, किन्तु वे सदैव हमारे साथ रहेंगे..
सत्य, प्रेम और ईश्वर का नाम तीनों ही इस धरती के नहीं अपितु ब्रह्मलोक के हैं जिन्हें कभी नष्ट नहीं किया जा सकता है…
भक्ति का अर्थ है-
“ईश्वर से ईश्वर को माँगना”
और भक्ति केवल ईश्वर के भक्त ही कर सकते हैं-
जिनमे अपने ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास हो, जिनमे अनन्य प्रेम हो, जिनके हृदय में सत्य का वास हो, वे लोग ही वास्तविक भक्त होते हैं…
हमे चाहिये कि हम अपने विवेक से अपने गुण और दोषों का मंथन करें, मंथन करने से सबसे पहले मन से विष निकल कर दूर हो जाता है, फिर करुणा का उदय होता है, और फिर परोपकार की भावना निकलती है, और जब मन में करुणा का उदय होने लगता तो दूसरों की सहायता करने की प्रवृति मन में स्वयं उत्पन्न हो जाती है… जब हम और आत्ममंथन करते हैं, तो लक्ष्मी निकलती हैं और लक्ष्मी ही विद्या है, हमारी प्रतिभा है, हमारी योग्यता है, और अन्त में अमृत यानी आत्मा- आत्ममंथन करने से आत्मतत्व का बोथ होता है-
और हमारी आत्मा शुद्ध हो जाती है…
और जब हमारी आत्मा शुद्ध हो जाती है तो
ईश्वर हमारे साथ हो जाते हैं तो
सुनील पुष्करणा