स्वर्णिम पड़ाव
नमस्कार साथियों,
यह अवगत कराते हुए अत्यन्त हर्षित हूँ कि सत्गुरु के आशीर्वाद और आप सबकी शुभकामनाओं से आज मैंने 4000 (चार हजार) काव्य रचनाएँ लिखकर पूर्ण कर ली है।
जीवन में ऐसे भी मुकाम आएंगे, कभी सोचा न था। लेकिन आप लोगों के साथ और परिजनों के असीम सहयोग ने यह सम्भव कर दिया।
आप सबका अनन्त आभार,,, 💐💐💐
आपका अपना साथी
डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति
( साहित्य वाचस्पति )