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26 May 2025 · 1 min read

पर वही खत्म कहा हो पाता है,

पर वही खत्म कहा हो पाता है,
यह हर पल बड़ता ही जाता है,

दोलत के चोरी का………!
रिश्तें की डोरी का……….!
वस्तु के टूटने का डर तो लगता हैं।
सत्य तो यही है डर ही जीवन है।

इस लिए मै तो कहता हूँ। डरो….
डर ही जीवन है, और जीवन ही डर
अब जो डर रहा है, वो ही जी रहा है।
जो जितना डरता है वो उतना जीता है।।

अनिल चौबीसा चित्तौड़

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