कभी-कभी लगता है
कभी-कभी लगता है
सब भूलती सी जा रही हूँ
वो चेहरे जो बहुत करीब से देखे थे
उनसे की हुई बातें और ना जाने कितनी मुलाकाते
सब धुंधला सी गई है
ऐसा महसूस होता हैं जैसे…
आंखों के तले समियाना सा तन गया हो
बहुत जोर देती हूं,
तो कुछ कुछ याद आता है
और बहुत कुछ तो भूल ही जाती हूँ
शायद याददाश्त कमजोर हो रही है
और नज़र भी…!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”