मृदु मृदु जब वह मुस्कुराए,
मृदु मृदु जब वह मुस्कुराए,
हृदय देख उसे मतवाला हा जाए।
कौन शहर से आई है दिवानी,
जो देखे दिवाना उसका हो जाए।
मृदु मृदु जब वह मुस्काए…..
आंखों में जब डाले काजल पगली,
दिन में रात सा मौसम आ जाए।
जब-जब खोले रेशमी जुल्फ़ें वो,
झूम कर काली घटाएं छा जाए।
मृदु मृदु जब वह मुस्काए….
मतवाली सी चाल दीवानी की,
चले तो फूलों की डाली झुक जाए।
कैसे संभाले दिल हम अपना,
उसकी सूरत में रब दिख जाए।
मृदु मृदु जब वह मुस्काए……!!
मधु गुप्ता “अपराजिता”