मंज़िल की दस्तक"
मंज़िल की दस्तक”
चल पड़ी है एक रौशनी, उम्मीदों की लौ थाम के,हर मोड़ पर लड़ी है वो, सपनों के हर जाम के।ना किसी सहारे की चाह, ना टॉपर की तालाश,बस अपने हौसलों से की है उसने हर शुरुआत।।।।
MPPSC की राहें हों चाहे कितनी भी कठिन,Dolly ने सीखा, गिर कर भी कैसे बनें संगिन।हर बार पास आई मंज़िल, हर बार थोड़ा दूर,पर किस्मत भी देख रही थी, उसका जज़्बा भरपूर।।।इंटरव्यू तक पहुंचना, बस एक इशारा है,कि सफलता बस एक कदम दूर तुम्हारा है।
ना कोई गाइडिंग फ्रेंड, ना नामी गुरू का साथ,बस मेहनत, नीयत और सच्ची लगन की बात।।।।।
जब दुनिया कहे थक जाओ, वो तब भी चलती है,जब वक्त दे इम्तहान, तो और ज्यादा जलती है।वो खुद की प्रेरणा है, खुद का उजाला है,हर बार जीत की ओर बढ़ने वाला उजाला है।।।।।
जो कह दे ये मुश्किल है, वो उसकी भाषा नहीं,जो कहे तू हार गई, वो उसकी परिभाषा नहीं।उसकी कहानी बनेगी कल की प्रेरणा,RCVP की गलियों में गूंजेगी उसकी साधना।।।।।
तू बढ़ती चल Dolly, समय तेरा आएगा,हर पसीना तेरा, एक दिन गुल खिलाएगा।तू खुद को जियो, अपने ख्वाबों में खो जा,जो लोग आज चुप हैं, कल सब बोलेंगे – “वो जा रही है… वो जा रही है… अफसर बनने!”।।।।।