काम दबाये चित्त में, करते हरदम ध्यान।
काम दबाये चित्त में, करते हरदम ध्यान।
समाधिस्थ यह है नहीं, समझों हे विद्वान।।
हो अभाव जो पूर्ण तो, प्रवृत्त स्वत: समाधि।
चिंता करते क्यों मरे, चिंतन में रख व्याधि।।
संजय निराला
काम दबाये चित्त में, करते हरदम ध्यान।
समाधिस्थ यह है नहीं, समझों हे विद्वान।।
हो अभाव जो पूर्ण तो, प्रवृत्त स्वत: समाधि।
चिंता करते क्यों मरे, चिंतन में रख व्याधि।।
संजय निराला