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26 May 2025 · 1 min read

आंखो से आकाश नापे हम

आंखो से आकाश नापे हम
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बगावत है आंखो में कोई बहम नही है,
तनिक झांक के देखो हरगिज़ नम नही।
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हाथ में कलम,बेसक जुबां मेरी तल्ख है,
हौसलों में दम है मगर, हाथ में बम नही।
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सच की राहों में चलना जुर्म है तो चलेंगे,
बेसक बेड़ियां पैर में डाले मुझे ग़म नही।
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अटल है इरादे तुफानों से जो टकराते है,
ख़रीदे कोई मेरे ज़मीर को ऐसा दम नही।
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हुनर हमने सीखा है पत्थरीली चट्टानों से,
आंखो से आकाश नापे हम भी कम नही।
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दुश्मन है गर ख़ौफज़दा तो हम क्या करे,
दिल में भय भर ले ऐसे “जैदि” हम नही।
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शायर:-“जैदि”
डॉ.एल.सी.जैदिया “जैदि”

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