ऑपरेशन सिंदूर
शूरवीर भारती के,भरते हुंकार जब,,
शत्रुओं के घर घुस, करते प्रहार हैं|
बैरियों के काल बन, भय के पर्याय बन,
वीरता से शत्रुओं का, करते संहार हैं|
नाम सुनते ही सारे,देशद्रोही काँप जाते,
ज्यों ही क्रोध में आकर, करते टंकार हैं|
बात जब कभी भी सिंदूर पर आ जाती है,
छीन लेते जीने तक, का भी अधिकार हैं।।
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम