*वही तो मसखरा होगा (हिंदी गजल)*
वही तो मसखरा होगा (हिंदी गजल)
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1)
वही तो मसखरा होगा
मनुज दुख से भरा होगा
2)
कटा जो पेड़ सावन में
न जाने कब हरा होगा
3)
अमर-फल बेचता था जो
कभी खुद भी मरा होगा
4)
भरत-सा बोझ राजा का
भला किसने धरा होगा
5)
किया व्यवहार निश्छल यदि
मनुज जग से तरा होगा
6)
नियति यह है बुढ़ापे की
सुमन खुद ही झरा होगा
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रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा (निकट मिस्टन गंज), रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 9997615451